- प्रेम मंजूषा : प्रेमचन्द की 16 सर्वश्रेष्ठ कहानियाँ - कफ़न, पूस की रात, बूढ़ी काकी, ईदगाह, गुल्ली डंडा, बड़े घर की बेटी, सद्गती, निमंत्रण, सभ्यता का रहस्य, अलग्योझा, नया विवाह, रानी सारन्धा, शतरंज का खिलाड़ी, मुफ्त का यश, दूध का दाम, गिला
- कलम, तलवार और त्याग प्रेमचन्द द्वारा रचित एक प्रेरणादायक पुस्तक है, जो इतिहास, राष्ट्रभक्ति और समाजसेवा की भावना को समर्पित है। इस पुस्तक में लेखक ने उन महान व्यक्तित्वों के जीवन पर प्रकाश डाला है जिन्होंने अपने विचारों, कार्यों और बलिदानों से समाज और राष्ट्र को नई दिशा दी। पुस्तक में प्रेमचन्द ने 15 ऐसे ऐतिहासिक एवं प्रेरणादायक व्यक्तित्वों का चित्रण किया है जो विभिन्न क्षेत्रों — राजनीति, समाज सुधार, युद्धनीति और शिक्षा — में अग्रणी रहे। इन व्यक्तित्वों के जीवन संघर्ष, विचारधारा, और योगदान को प्रेमचन्द ने सजीव भाषा में प्रस्तुत किया है। यह पुस्तक न केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज है बल्कि यह युवाओं को आदर्श जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करती है। कलम, तलवार और त्याग उन विचारों और आदर्शों का प्रतिनिधित्व करती है जो किसी राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रेमचन्द ने इन महान आत्माओं को केवल वर्णित नहीं किया, बल्कि उनके जीवन को एक जीवंत प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया है।
- "पाँच फूल – प्रेमचन्द की पाँच अनमोल कहानियाँ सन् 1929 में प्रकाशित पाँच फूल प्रेमचन्द की ऐसी कहानियों का संग्रह है, जो जीवन के विविध पहलुओं को मार्मिक और यथार्थवादी ढंग से सामने लाती हैं। इसमें शामिल पाँच कहानियाँ— कप्तान-साहब – सामाजिक प्रतिष्ठा और दिखावे की मानसिकता पर गहरी चोट। स्तीफ़ा – सत्ता, स्वार्थ और नैतिक दायित्व के बीच जूझते चरित्र की कथा। जिहाद – धर्म और मानवता की जटिलताओं को उजागर करती संवेदनशील रचना। मंत्र – अंधविश्वास और विश्वास के संघर्ष में मानवीय संवेदना की खोज। फ़ातिहा – जाति-पाँति, आडंबर और करुणा की सशक्त व्याख्या। इन पाँचों कहानियों में प्रेमचन्द ने भारतीय समाज की कड़वी सच्चाइयों, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक प्रश्नों को सहज भाषा में प्रस्तुत किया है। पाँच फूल केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि भारतीय समाज और मनोविज्ञान का सजीव दस्तावेज़ है, जो आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना अपने समय में था।"
- "सप्तसरोज – प्रेमचन्द की सात कालजयी कहानियाँ प्रेमचन्द का कहानी-संग्रह सप्तसरोज (1917) हिंदी साहित्य की अमूल्य धरोहर है। इसमें सात कहानियाँ शामिल हैं, जो भारतीय समाज के यथार्थ, मानवीय संवेदनाओं और नैतिक मूल्यों को अत्यंत सरल, किन्तु गहरे प्रभावशाली रूप में प्रस्तुत करती हैं। बड़े घर की बेटी – सामाजिक अहंकार और रिश्तों की सच्चाई को उजागर करती कहानी। सौत – ईर्ष्या, द्वेष और स्त्री के अंतर्द्वंद्व का मार्मिक चित्रण। सज्जनता का दंड – भलेपन और नैतिकता के विडंबनापूर्ण परिणामों की कथा। पंच परमेश्वर – निष्पक्ष न्याय और कर्तव्यनिष्ठा का अद्वितीय चित्रण। नमक का दारोगा – भ्रष्टाचार और ईमानदारी के संघर्ष की कालजयी कहानी। उपदेश – आदर्श और व्यवहारिक जीवन के बीच द्वंद्व को दर्शाती रचना। परीक्षा – मानव चरित्र की असली पहचान कठिन परिस्थितियों में कैसे सामने आती है, इसका सशक्त चित्रण। इन कहानियों में प्रेमचन्द ने आम आदमी के जीवन, उसके संघर्ष, रिश्तों और समाज की बारीकियों को जिस यथार्थ और सरलता से व्यक्त किया है, वही उन्हें कालजयी बनाता है। सप्तसरोज न केवल कहानियों का संग्रह है, बल्कि भारतीय समाज का जीवंत दर्पण है।"
- "नव-निधि – प्रेमचन्द की नौ अमूल्य कहानियाँ प्रेमचन्द का कहानी–संग्रह नव-निधि (1948) मानवीय जीवन के नैतिक, सामाजिक और भावनात्मक द्वंद्वों का सजीव चित्र है। सरल भाषा, सधी हुई कथावस्तु और गहरी संवेदना—यही इसकी पहचान है। संग्रह में सम्मिलित नौ कहानियाँ: राजा हरदौल – त्याग और मर्यादा की गौरवगाथा, लोककथा-सी धड़कन के साथ। रानी सारन्धा – वीरता, निष्ठा और स्त्री–सम्मान का प्रेरक चित्रण। मर्यादा की वेदी – रिश्तों में ‘धर्म’ बनाम ‘कर्तव्य’ का कठोर प्रश्न। पाप का अग्निकुण्ड – अपराध-बोध और आत्मशुद्धि की ज्वाला में तपता मन। जुगुनू की चमक – अँधेरे वक्त में आशा की छोटी, पर मार्गदर्शक रोशनी। धोखा – स्वार्थ, भ्रम और विश्वासघात की पेचीदगियाँ। अमावस्या की रात्रि – भय, अंधविश्वास और मनोवैज्ञानिक तनाव का मार्मिक रेखांकन। ममता – मातृत्व की निस्वार्थ छाया और उसकी नैतिक परीक्षा। पछतावा – गलती के बाद जागी अंतरात्मा की कचोट और मुक्ति की चाह। नव-निधि में प्रेमचन्द आम जन की पीड़ा, ईमानदारी, संघर्ष और मानवीय करुणा को इतने सच्चे यथार्थ से उकेरते हैं कि कथाएँ पढ़कर देर तक मन में गूंजती रहती हैं। यह संग्रह आज भी उतना ही प्रासंगिक है—क्योंकि मनुष्य और उसकी नैतिक चुनौतियाँ समय से परे हैं।"
Premchand Ki Shreshth Rachnayen | प्रेमचन्द की श्रेष्ठ रचनाएँ (Set of 5 Books)
SKU: 9789395437943
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Author
Premchand
Publisher
Kitabeormai Publications
No. of Pages
747
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