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  • "मनुष्य बाहर से जैसा दिखाई देता है, वह वैसा होता नहीं। उसके भीतर कई परतें होती हैं—करुणा, संघर्ष, अपराध-बोध, प्रेम, स्वार्थ, त्याग और मौन की पुकार। जयशंकर प्रसाद की ये कहानियाँ उन भीतर की परतों को उजागर करती हैं। ‘गुण्डा’ सहित इस संग्रह की कथाएँ समाज के हाशिये पर छूटे हुए लोगों के बारे में हैं—वे लोग जिन्हें अक्सर दुनिया कठोर, असभ्य या महत्वहीन मान लेती है। परंतु प्रसाद दिखाते हैं कि सबसे कठोर चेहरे के पीछे भी एक कोमल हृदय धड़कता है, जो प्रेम और मनुष्यता की भाषा समझता है। यह संग्रह केवल कहानियों का संग्रह नहीं, बल्कि मनुष्य के हृदय की यात्रा है— जहाँ दुखिया में पीड़ा के बीच गरिमा चमकती है, गूदड़ साईं में त्याग मौन दीपक की तरह उजाला करता है, परिवर्तन में अपराध-वृत्ति करुणा की गोद में पिघल जाती है, और उस पार का योगी हमें आत्मा के प्रकाश की ओर ले जाता है। प्रत्येक कथा पाठक को रुककर भीतर झांकने पर विवश करती है। शब्द सरल हैं, पर अर्थ गहरे और लम्बे समय तक मन में बस जाने वाले। “गुण्डा” बाहरी कठोरता और भीतरी संवेदना के संघर्ष की कहानी है — जहाँ अपराधी नहीं, मनुष्य देखा जाता है।"

  • "“उसने कहा था एवं अन्य कहानियाँ” हिंदी साहित्य के आरंभिक काल की ऐसी अमर रचना-संग्रह है, जिसने कहानी कला को एक नई पहचान दी। इस संग्रह की प्रमुख कहानी “उसने कहा था” केवल प्रेम-कथा नहीं, बल्कि कर्तव्य, त्याग और मानवीय संवेदना का अद्भुत उदाहरण है। इसमें लहना सिंह का प्रेम, निष्ठा और बलिदान पाठकों के हृदय को छू लेता है। चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ की भाषा की सादगी, संवादों की सहजता और पात्रों की मानवीय गहराई इन कहानियों को आज भी जीवंत और कालातीत बनाती है। संग्रह की अन्य कहानियाँ भी समाज, संस्कृति और इंसान की आत्मा को झकझोरने वाली हैं। यह पुस्तक न केवल हिंदी कथा-साहित्य का आधारस्तंभ है, बल्कि मानव हृदय की करुणा और आदर्शों का अमर दस्तावेज़ भी है। “उसने कहा था — तुम मुझसे वादा करो कि तुम मुझसे धोखा नहीं करोगी...” यह वाक्य आज भी प्रेम और त्याग की प्रतिध्वनि बनकर गूंजता है।"

Hindi Bhasha Ke Amar Ratna | हिन्दी भाषा के अमर रत्न (Set of 2 Books)

SKU: 9788199232174
₹325.00Price
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  • Author

    • Jaishankar Prasad
    • Chandradhar Sharma Guleri
  • Publisher

    Kitabeormai Publications

  • No. of Pages

    206

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